चलती रही ज़िंदगी , मिलते रहे कारवां
कुछ अपने से लगे यादों में बस गये
तो कुछ वक्त के साथ धुंधले पड़ गए
यूं ही मिलते रहे बिछड़ते रहे
चलती रही ज़िंदगी , मिलते रहे कारवां
बारिश की पहली रिमझिम फ़ौवार
की तरह कोई भा गया कारवां ऐ मोड़ पर
रु बरु भी हुआ नहीं दिल के जुदा हो गए हम
कारवां ऐ ज़िंदगी के इक नए मोड़ पर
गजब हाले दिल हे अनामिका
मुस्कुराना सीख ही लिया फिर से
नई कारवां ऐ ज़िंदगी में शामिल हो कर
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