इंसान सिर्फ भूमिका निभाता है
हार हो या जीत कर्मों की होती है
इंसान वैसा ही फल पाता है
जैसा वो कर्म बीज को बोता है!!
राजा हो या हो रंक सिर्फ
इंसान के कर्मों की माया है
कर्मों ने किसी को आसमान में बैठाया
उन्हीं कर्मों ने की किसी को
धूल भी चटाया है!!
जाने किस बात का अहंकार करता बंदे
न तू लेके आया था , न लेके जा पाया है
कहता और जनता हर इंसान है
जान , समझ के भी इंसान ईश्वर
कि लीला समझ न पाया है!!
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