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जैसे आ गई बरसात बिन बोले

                
                                                         
                            नव तपा में गर्मी बढ़ी धम्म धम्म
                                                                 
                            
घनेरे घनेरे बादल छाए और पानी
गिरा छम्म छम्म
मन का मयूर डोले और
पपिहा बोले पीहू पीहू
कोयलिया छेड़े राग , सब को हुई
भ्रांति जैसे आ गई बरसात बिन बोले
पिया भी नैनो से बोले हौले हौले
मनवा शर्माए प्रीत रंग में रंग जाय
नई उमंग भर जाए कानों में जब
सजन प्रेम रस घोले
सबको हुई भ्रांति जैसे आ गई
बरसात बिन बोले !!
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2 महीने पहले

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