हम नदी के दो किनारे न तुम हमारे न हम तुम्हारे
दूर - दूर से ही हम इक दूजे को निहारे
मैं धरा तुम आसमा , मिलन संभव नहीं
हमारे ।
मैं दिन तुम रात हो प्यारे कैसे आओगे
नजदीक हमारे
तुम खुश रहो अपनी दुनियां में हम खुश रहे
अपनी दुनियां में , तभी खुश होंगे अपने सारे
इन सब के बाद भी उम्मीद , आस बन के
बसेंगे दिल में तुम्हारे तुम बसोगे दिल में हमारे !!
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