इक चहरे ने जो ख्यालों में बसा हुआ है
दिल छीन लिया मेरा
हर तरफ जिधर रुख करूं
उसका तसव्वुर नज़र आता है
चंद लफ्जों में उसके , मेरे लिए जैसे
सारा कायनात बिछ जाता है
दिलों जान से दिल फ़िदा मेरा उसपे
उसके सिवा मुझे कोई जच नहीं पता हैं
कभी खत्म न होगी ये दास्तानें मुहब्बत मेरी
अब तुम ही कहो ,हाल दिल का क्या - क्या बताए
तुम्हे ?
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