जब दुनियां ने मेरे आसमा मे अंधेरा किया
मैने तब खुद अपना जहां रौशन किया
मैने लोगों का जमवाड़ा इक्कठा नहीं किया
बस कुछ चुनिंदा पुष्प से अपना गुलशन आबाद किया
मैने कभी चांद सितारों की ख्वाहिश नहीं की
दीप जला कर ही अपने बसेरे में उजाला किया
माना ग़म कम नहीं थे मगर , थोड़ी सी खुशियों में
ही हंसने का हुनर सीख लिया ।
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