कांटे ही बिछाना था जो राहों में तो ,
सुकोमल क्यूँ बना दिया।
दिल को मेरे पत्थर ही बनाना था तो ,
उस दिल को फिर धड़कना क्यूँ सीखा दिया।
मेरे अंजुमन में तन्हाइयों का ही डेरा था
फिर किसने उन्हें अनामिका तेरा पता बता दिया ।
वक़्त और हालात से लड़ कर जीत भी जाते हम
वो ख़ुदा तुमने हमें किस्मत के बंद दीवारों में ही चुनवा दिया !!
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