मासूम सी नन्ही कलि बाग में थी उगी
नादा माली तोड़ के गया उसे
खिलने से पहले मुरझा गई
पत्ता - पत्ता बिखर गई !
माटी की वो मासूम परी
धीरे -- धीरे थी बढ़ चली
छूटा बाबुल का अंगना
आया बैरी हवा का झोंका
तार - तार कर , उसको तोड़ गया
दोष किसका था ये , रब तू ही बता रे
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