जाने कौन सी डगर तू मुझको ले चला रे
नई हे राहें ये नया है सफर होके बेखबर
मै तेरे संग -- संग हो चला रे
ठहर देख तो नज़ारे है कितने प्यारे
क्या इस सफर की मंज़िल भी
होगी क्या ऐसी खूबसूरत रे
दिल तू मनचला रे
अपनी गली को छोड़ कर
सखी सहेलियों से अपनो से
अलविदा बोल कर
क्या खुश रह पाऊंगी
उन्हें भूल कर , बावला दिल
तू ना कर ऐसा गजब रे
दिल तू मनचला रे ।
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