बेशक दिल की बात दिल तक पहुंच जाती है
पर ज़िंदगी की राहों में , ज़िंदगी से उलझ जाती है
कभी दिल को मुकम्मल जमीं नहीं मिलती
तो कभी मुकम्मल आसमा नहीं मिलता
दिल नादा जाने क्यूँ इतनी सी बात
नहीं समझता , दिल की बात दिल में रहे
तो मुनासिब है , ज़माने में दिल की
फ़रियाद पूरी न पहले कभी हुई
न शायद पूरी कभी होगी !!
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