दिल का आलम दिल जाने
और जानो तुम
दिल का आलम ...…
मै सुखी रेत भई , मै सुखी रेत भई
बरसे नयन पर भीगे न जिया
पर भीगे न जिया ......
शोर है भीतर कितना , लबों की
खामोशी देख कर कोई क्या जाने पिया
दिल जाने और जानो तुम
दिल का आलम .......
विरह की अग्नि जलाए , चैन न आए
इक पल भी , कोई कैसे ये आग बुझाए
जो आग प्रीत लगाए
बुझा सको तो वो हो सिर्फ तुम
दिल का आलम दिल जाने
और जानो तुम !!
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