दर ब दर हो के फ़िरूं
मगर मिलता नहीं
गांव -- गांव ढूंढू उसे ढूंढू शहर -शहर
भटकूं गलियों में चौबारों में
जाने कहां हे वो मेरी मंजिल
समंदर किनारे बसे बसेरों में
मिलता नहीं उसका निशा
पर्वत -- पहाड़ों से घिरे आशियानों में
पुकारूं में रब को दुआ करूं जाके ख़ुदा के दर पे
दिल ढूंढता है उसे जाने कहां - कहां !!
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