आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

दिल ढूंढता है उसे जाने कहां - कहां

                
                                                         
                            दर ब दर हो के फ़िरूं
                                                                 
                            
मगर मिलता नहीं
गांव -- गांव ढूंढू उसे ढूंढू शहर -शहर
भटकूं गलियों में चौबारों में
जाने कहां हे वो मेरी मंजिल
समंदर किनारे बसे बसेरों में
मिलता नहीं उसका निशा
पर्वत -- पहाड़ों से घिरे आशियानों में
पुकारूं में रब को दुआ करूं जाके ख़ुदा के दर पे
दिल ढूंढता है उसे जाने कहां - कहां !!
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
8 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर