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धीर धर हे मन

                
                                                         
                            कितना व्याकुल कितना
                                                                 
                            
तू है चंचल हे मन
प्रेम पथ पर बढ़ धीरे धीरे
ना इतनी अधीरता कर
लंबी डगर है , इस डगर में
लोकव्यापी कठिनाइयां आएंगी
प्रतिपाल
धीर धर हे मन ।
जैसे जैसे प्रीत की चाह बढ़ेगी
तरस जाएंगे तेरे दो नयन
सुध बुध गवां कर अपना
तू यूं ना बावला बन
धीर धर हे मन
मिलन की बेला आएगी
जब , बरसेंगे तब फूल सुमन
खुशी के अश्रु से भर जाएंगे तेरे सूखे नयन
तब जाके होगा मधुर मिलन
धीर धर हे मन
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9 महीने पहले

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