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दौर ऐ ज़माना

                
                                                         
                            दौर ऐ ज़माना बागी लगता है
                                                                 
                            
समझ के बाहर है ऐ अनामिका
चेहरा ही नहीं आईना भी झूठा लगता है
रिश्तों को बांधे रखा था जिन बड़े बूढ़ों ने
उनके लिए वृद्धा आश्रम खुला रखा है
विवाह था , जो सात वचनों सात जन्मों का बंधन
वो आज तलाक़ के इक काग़चो से टूटा है
बच्चे वो भी ढल गए नए परिवेश में
तमीज तहजीब छोड़ के
शामिल हो गए आधुनिकता की अंधी दौड़ में
हरकतों ने इनकी पुरातन जड़ों को
हिला रक्खा है।
-अनामिका 
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9 महीने पहले

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