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दर्द से भरी दास्तां

                
                                                         
                            मुझको मय खाने का पता दे दो
                                                                 
                            
भूल जाऊं सारे दर्द ज़माने भर के
ऐसी कोई दवा हो तो वो दवा दे दो
शराबी न समझना यार मुझे
प्यार का मै मारा हूं , दिल किसी
ज़ालिम पे हारा हूं
और क्या ख़ाक बचा है दुनियां में
अपना सब कुछ तो उस दिल जले पे वारा हूं
चाहत तो मेरी भी थी , मुहब्बत की
मेरी भी इक दास्तां हो
खबर क्या थी , वो जिसे ज़िंदगी समझ बैठा
मै वो ज़िंदगी बे वफ़ा निकलेगी
मुझको यारो माफ करो
हो सकें तो मुझे मय खाने का पता दो !!
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6 महीने पहले

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