छुट्टियां सब की मन भावन होती है
बच्चों को ही नहीं बड़ों को भी इंतज़ार होता है
छुट्टियों का !
क्योंकि , थकान से भरा तन और मन
दोनों को आराम की जरूरत होती है
इसलिए , कभी कभार ले लिया करिए
छुट्टियां !
तन्हा हो अगर तो दूर कहीं पहाड़ियों
में चले जाओ , उगते हुए सूरज की लालिमा
के साथ अपना वक़्त बिताओ !
माता -- पिता हो संग तो उन्हें
तीर्थ करवा लाओ , पत्नी और बच्चों के संग
सैर सपाटे का मज़ा सारे मजे से श्रेष्ठ है !
नई नवेली दुल्हन , या हो प्रियतमा संग
इस धरा में भी जन्नत है जाओ छुट्टियों में
और भविष्य की सुनहरी यादें बनाओ !!
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