मैंने ज़िंदगी मै इक ही रंग देखा
वो है काला रंग , शायद इसलिए
मुझ को समझ नहीं कितने खूबसूरत होते है
बाकी रंग
न मेंहदी का सुनहरा रंग देखा मैंने
न लाल सिंदूरी रंग की दमक देखी मैंने
हरा रंग आते - आते रह गया
पिंक रंग का परवान चढ़ नहीं पाया
या हमने ही चढ़ने नहीं दिया
बस दूर से देखा आसमा में
चमकता सतरंगी रंग
तब खबर हुई होते है कितने रंग
बे खबर खुद रही रंगों से
पर कोशिश रही हमेशा
दूसरों की ज़िंदगी में भर सकूं
ये सारे रंग !!
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