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चालबाजी दुनियां में , मै हूं अल्हड़

                
                                                         
                            जैसे खिली अधकली मासूमियत से भरी
                                                                 
                            
जैसे नादा सी इक परी अजनबी दुनियां में
पहली - पहली बार आके इंसानों से मिली
लोगों की फितरत से वो अनजानी
कौन अपना कौन पराया न समझी
न पहचानी !
हो ओ .... नदी धारा सी निर्मल
किसी झील में दुनियां की भीड़ से ज़ुदा
होके खिली वो बन के कमल
संगीत की धुन में गीतों के सरगम में
जो दिल को भाने वाली मगर सब के बीच होके
भी जुदा सबसे ऐसी अनोखी बना के भेजा तुझे रब ने !!
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7 महीने पहले

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