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भीगी - भीगी मेरी पलके

                
                                                         
                            भीगी - भीगी मेरी पलके
                                                                 
                            
ख्वाब को बिखरते देख के,
आंसुओं को थाम न पाई
गालों में लुढ़के आंसू नहीं
लहू उम्मीदों का था
जो कतरा कतरा बह गया था
इल्ज़ाम किस को दे अब
शायद में खुद गुनहगार था
भीगी - भीगी मेरी पलके .......
वक़्त के हाथों का इक खिलौना
जैसे मै बन गया , तोड़ा था
तकदीर ने तो पहले ही
लोगों ने भी मौका छोड़ा नहीं
तड़प कर रूह भी करे अब मुझे सवाल तो
क्या जवाब दूं उसे मैं ख़ुदा तू ही जवाब दे
भीगी - भीगी मेरी पलके .................
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6 महीने पहले

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