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भरम जो टूट गया

                
                                                         
                            मां के आंचल तले हसीन ज़िंदगी
                                                                 
                            
पिता की उंगलियों को पकड़े
धीरे -- धीरे आगे बढ़ती जिंदगी
भाई -- बहनों की आपस की तकरार
समानों की छीना -- झपटी
पर अंत में बच ही जाता
एक दूजे के प्रति स्नेह प्यार
पलक झपकते कब इक दौर बीत गया
लगता था कि ये खुशनुमा ज़िंदगी
कभी बदलेगी नहीं ये पल कभी थमेगा नहीं
भाई का ब्याह बहन की शादी
नए -- नए रिश्ते कुछ मीठे से कुछ तीखे से
जाते - जाते साल पर साल
बदलते गई हर बात ।
बात ये भी नहीं खुशियों का आगमन नहीं हुआ
पर इक जो भरम था हम होंगे सदा साथ -- साथ वो भरम जरूर टूट गया ।
शायद दुनियां की यही रीत है , बेटियां पराई होती हैं ।
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8 महीने पहले

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