ज़माने को क्यों और कैसे समझाए
बेताब दिल की धड़कन हो तुम
दिल की लगी दिलबर ही जाने
ये जो सुलगती आग़ है
ज़माने को क्यों और कैसे समझाए
रफ़्ता रफ़्ता बढ़ता है ये रोग
जो मिले महबूब का साथ
तो ही ज़ान बचपाए
ज़माने को क्यों और कैसे समझा
इक ख़ुदा ही जाने हाले दिल
और जाने सनम
ये मोहब्बत है क्या
ज़माने को क्यों और कैसे समझाए
-अनामिका
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