सजदा तुझ पे तेरी बेपनाह मुहब्बत पे
न दीदार की हसरत न मिलने की ख्वाहिश
फिर भी इक ही मन्नत के दरमिया रहे
बस मुहब्बत ही मुहब्बत
सुनी थी बस हमने ऐसी पाक़ीज़ा मुहब्बत !!
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