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अपना न सही तू पराया ही सही

                
                                                         
                            इक बात कहूं बहुत खटकता है वो दिन
                                                                 
                            
जब तू ख़ामोश रहता है
तू आदत में शामिल हो गया मेरी
शायद तुझे नहीं पता है
जरूरत नहीं तू मेरी , तू मेरे लिए जरूरी है
अपना न सही तू पराया ही सही
पर तुझे मेरी फ़िक्र अपनों से भी ज्यादा रहती है
तू मेरी और मैं तेरी मंज़िल न सही
पर रास्ता इक हो हमारा यही दुआ लबों पे रहती है
मिलना संभव नहीं फिर भी बिछड़ने का ये डर कैसा है
तेरा मेरा रिश्ता राधा कृष्ण जैसा है !!
बाते करूं तो बाते ख़त्म न होगी
मेरी बेरंग ज़िंदगी में तू हर रंग बनके घुला है
पतझर में तू छाया बहार बनके
जैसे तू देख रहा , जब निहारूं मैं आईना श्रृंगार करने
किस्से कहानियों में तेरी - मेरी दस्ता होगी
सोचती हूं बिन तेरे मेरी ज़िंदगी कैसे पूर्ण होगी !!
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5 महीने पहले

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