पंछी लौट जाते है , अपने घोंसलों में
आखिरकार
उड़ान चाहे कितनी भी दूर हो !
दो पल चाहे सुस्ता ले किसी अन्य वृक्ष पे
अंततः
अपना घरौंदा ही याद आता है !!
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X