अहले दिल की दास्तां क्या सुनाए तुम्हे
दो कदम तुम साथ हो कैसे अपना बनाए तुम्हे
अहले की दास्तां .......
जो चांद ना ठहरा कभी मेरे आशियाने में
जो चांद ना .....
कैसे उस चांद से कह दे , कि मेरे आसमा मे भी
अपनी चांदनी बिखरा दे
अहले दिल की दास्तां .......
खुद भटकता रहा दिल मेरा सुकून की तलाश में
वो नादा तू बता कैसे ये दिल मेरा तेरे दिल की
प्यास बुझा दे
अहले दिल की दास्तां ...
जिसकी मुकम्मल खुद की दुनिया नहीं
कैसे फिर किसी को वो पनाह दे
अहले दिल की दास्तां क्या सुनाए तुम्हे
दो कदम तुम साथ हो कैसे अपना बनाए तुम्हे ।
-अनामिका
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