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अब ढूंढू वो अपनापन प्यार मैं कहां

                
                                                         
                            मैं भी कभी चाँद सा टुकड़ा
                                                                 
                            
तेरे हृदय का हुआ करती थी मां
जाने कैसे उस चाँद की चांदनी कहां खो गई मां
पापा तेरी लाड-दुलारी मैं भी
हुआ करती थी न
जाने कैसे उस लाड - दुलारी की
खुशियों को ये कैसा ग्रहण लग गया बताओ न
वो बचपन मेरा मुझको बहुत याद आता है मां
जब पापा मेरे इक इशारे पे
मेरे कदमों पे रख देते थे सारा जहां
आज जो आंखों से आंसू भी बहे तो
कोई नहीं पूछता है , क्या हुआ
तुझको अनामिका बता
कहां तुम खो गए क्यों मुझसे
जुदा तुम हो गये
अब ढूंढू वो अपनापन प्यार मैं कहां !!
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5 महीने पहले

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