मंदिर -- मंदिर भटका मैं
न मिले तुम राम
न मिले तुम श्याम
झांका जब हृदय में
तो पाया मैने
मुस्कुराते हुए राम
तो पाया मैने
मुस्कुराते हुए श्याम
जय जय श्री राम
जय जय श्री श्याम
इतनी सी बात मै
समझ न पाया
आत्म रूपी मंदिर में
ही होते हैं चारों धाम !!
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X