वो रंग दो मुझको कान्हा
जिस रंग में रंगा था तुमने
द्वापर की दुनियां सारी
प्रेम , प्रीत की बोली तुम्हारी
रंग देती थी गोपियों की देह सारी
उसी रंग में फिर से रंग जाए दुनियां सारी
ढोल मंजरी , नगाड़े बजे
रंग - गुलालो से खिले अम्बर
सज जाए रंगों से धरती सारी
मीठे पकवानों से महके घर आंगन
बच्चों जवानों की मस्ती करें टोली
मिल कर बच्चे , बूढ़े , जवान सब खेले
खूब होली !!
राग , द्वेष , का त्याग कर के
एक दूजे से मिले गले लगा के
लगा के प्रेम की रोली।
भूल जाए गिले शिकवे सारे
सबको ये सीख दे जाए होली
आओ मिल जुल कर सब खेले
खूब होली !!
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