आज न जाने क्यूँ आँखें हुई नम
जैसा टूट गया हो कोई भरम
ख्वाब को मान हक़ीक़त जीने लगे थे हम
कोई तो लौटा दे मेरा खोया चैन अमन
आज न जाने क्यूँ आँखें हुई नम
जिसका सर सजदे में रब के झुकता है
तकदीर का ये खेल उसी को छलता है
तिनका -- तिनका बिखर गया
सपनो का महल
आज न जाने क्यूँ आँखें हुई नम
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