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तब तक "हाउस" नहीं सोचो समझो

                
                                                         
                            गृहिणी परिवार की ऋणी है,सोचो समझो
                                                                 
                            
कभी माता,कभी पत्नी बन कर कभी बाई
बारह महिने 24 घंटे "नो सैलरी"से
काम करने वाली दाई ,माई, बाई है,
जो घर में " On Line"में रहती।
घर बनता ईट से पर घर,सजता संवरता गृहिणी से।
पौधे से वृक्ष की तरह घर को आगे बढाने वाली गृहिणी है।
जब तक गृहिणी नहीं, घर परिवार नहीं,
जब तक परिवार नही, संसार नहीं।
"घर और ऑफिस" में मशीन की
तरह आज की कामकाजी गृहिणी है।
नौकरी की रिटायरमेंट 60 साल,
गृहिणी की रिटायरमेंट अंतिम सांस तक।
अपनी जरूरतो को त्याग कर सुखदुःख
सह कर अपना फर्ज निभाने वाली
एक "हाउस वाइफ" ही हाउस लाईफ है
जब तक "हाउस वाइफ" नहीं
तब तक "हाउस" नहीं सोचो समझो।
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23 घंटे पहले

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