तू दिखी मुझे हीरा की तरह,
हुआ प्यार मीरा की तरह,
मिले हम सरफिरा की तरह,
बाप तेरा खा गया खीरा की तरह,
मैं पेट में बना पीड़ा की तरह,
उसने निकाल दिया जलजीरा की तरह।
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
कमेंट
कमेंट X