दीप जलते रहें जगमगाते रहें
इस दिवाली सभी मुस्कुराते रहें
कोई घर न रहे कष्ट या शोक में
घर के बच्चे सभी खिलखिलाते रहें।
प्रेम से सब रहें प्यार सबसे करें
साथ मिलकर सभी भक्ति मन से करें
धन की देवी का होगा तभी आगमन
भाई-भाई से नफ़रत मिटाते रहें
दीप जलते रहें जगमगाते रहें
इस दिवाली सभी मुस्कुराते रहें।।
हो हमेशा कलह ये नहीं ठीक है
द्वार पे रोये नारी नहीं ठीक है
थोड़ा संयम रखें, नासमझ न बनें
नासमझ है उसे कुछ सिखाते रहें
दीप जलते रहें जगमगाते रहें
इस दिवाली सभी मुस्कुराते रहें
- अमित प्रेमशंकर
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