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ये और बात है

                
                                                         
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जो याद बन गया लम्हा, वो दिल में है,
ये और बात है कि दर्द मुश्किल में है।

लब ख़ामोश हैं, आँखों में नमी है,
दिल में आज भी कोई कमी-सी है।

हम ख़ुद ही नहीं समझते अपनी बातें,
किससे कहें दिल की अनकही मुलाक़ातें।

किसे बताएँ क्या खोया, क्या हासिल है,
किसकी धड़कन में कौन-सा दिल शामिल है।

कुछ रिश्ते अधूरे होकर भी ख़ास होते हैं,
कुछ लोग दूर होकर भी दिल के पास होते हैं।

हर एहसास को लफ़्ज़ों में ढालना मुमकिन नहीं,
हर दर्द को दुनिया से बताना ज़रूरी नहीं।

जो दिल में बसा है, वो भुलाया नहीं जाता,
हर अपना शख़्स लफ़्ज़ों में बताया नहीं जाता।

हम ही जब ख़ुद से ख़ुद की ख़बर नहीं रखते,
तो दूसरों के दिल में क्या है, कैसे समझते?

बस इतना ही सच है इस दिल की महफ़िल में
कुछ यादें हमेशा रहती हैं दिल में,
"और कुछ बातें रह जाती हैं दिल ही दिल में।"
-आचार्य अमित
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एक घंटा पहले

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