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खुदाया करम इतना सा तू फरमा

                
                                                         
                            सितमगर
                                                                 
                            
कुछ शिकवे ऐसे भी होंगे,
जो गुनहगार कर जायेंगे मुझे,
इसका यह मतलब नहीं
तुम सितमगर हो गए...
बात सिर्फ इतनी सी है
तुमने जीता सबका दिल
जग जीतने के बाद भी
हम तुमसे खाली रह गए
तुमने सहा नादानियों को मेरी,
यह अबके बरस क्यों कर हुआ,
हमने जो कहना न था
वो भी तुमसे कह गए
तुम खुद को खतावार न कहो
कोई खता तन्हा नहीं
महफ़िलों की गुस्ताख़ियों को भी
हम सजदा समझकर सह गए
एक बात और तुमसे कहूं
गर कर सको मेरा यकीं
तुम्हारी खुशी ही अपनी खुशी
बस यह कहते हुए
हम हमेशा रह गए
मेरे दिल की दुआओं का
बस है इतना ही सरमाया
रहे होंठों पर तेरे हँसी
खुदाया करम इतना सा तू फरमा
यहीं सांसें मेरी कहे तुमसे
जो अभी शब्द मेरे हैं कह गए....
-आचार्य अमित
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एक घंटा पहले

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