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बस ज़ुबां को जाने क्या हुआ

                
                                                         
                            मुहब्बत
                                                                 
                            

बात उन दिन की है
जब प्यार दुलार
इश्क़ मुहब्बत बनने की
कतार में बाहें पसार रहा था
उन दिनों मेरा भी दिल
अपने किसी ख़ास को
पल - पल निहार रहा था
कुछ पशोपेश में दिलोदिमाग
लगे हुए थे फिर भी
हमारा दिल उनको पुकार रहा था
जब इस बात का इल्म
उनको भी होने लगा
मानो हमारा क़रार और
बेक़रार होने लगा
बड़ी मुश्किल हुई हमें
खुद को यह समझाने में
एक मुद्दत लगी थी हमें
दिल को दिल बनाने में
आज यह दिल कहीं
बेदिल न हो जाए
मेरी सभी हसरतें
कहीं पामाल न हो जाए
थोड़ी हिम्मत की हमनें
और कह डाली दिल की बात
प्यार इश्क़ मुहब्बत अब
जो भी हो है तुम्हारे हाथ
वो मुस्कुराए और कहने लगे
कौन है आप...?
बस ज़ुबां को जाने क्या हुआ
सब ख़ामोश शज़र सा ढह गया
मेरा जो कुछ गुरूर था
सब रेत की मानिंद हवा में
बह गया.....
-आचार्य अमित
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एक घंटा पहले

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