सुबह उषा, शाम में निशा,
आसमान में वर्षा चाँदनी का किस्सा।
इन्द्रधनुष के रंगों में लिपटी सुंदरता,
बहुरंगी साड़ी उनके श्रृंगार का हिस्सा।
वर्षा बरसे तो धरा हो जाए आत्मसात
चाँदनी से हो जाए रोशनी की शुरुआत।
किरणो का दिन, चाँदनी की रात!
बिजली की झलक से कहा बनेगी बात,
काश! ठहर जाती ये टिक-टिक करती घड़ियाँ,
आसमान से उतर आती कोई प्यार-प्रीत की परियाँ।
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