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चौखट,खिड़कियाँ हुइ खराब

                
                                                         
                            कहीं मकान किश्तें दे गईं,
                                                                 
                            
कहीं दीवारें रिश्ते ले गईं।
गांव से शहर पहुँचते पहुँचते
पगडंडिया, टुटते चप्पल घिसते ले गई

कैसे टूटे घर?
कैसे टूटे ख्वाब?
ताले की चाबी से,पूछो
देगी कोई जवाब!

ना रहा कोई राजा,
ना रहा कोई नवाब,
दरवाजे खड़े-खड़े खत्म हो गए,
चौखट,खिड़कियाँ हुइ खराब

ये लटके हुए ताले,
ये ढहते हुए घर-आँगन,
सुनाते हैं कुछ अजीब दास्तान
आज उनके लिए ज़मीं भी नहीं,
जो कभी थे आसमान।
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45 minutes ago

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