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मैं कोई कवि नहीं हूँ, मैं कोई शायर नहीं हूँ

                
                                                         
                            मेरे हुनर की इस दुनिया से तुलना ना करो,
                                                                 
                            
मैं कोई कवि नहीं हूँ, मैं कोई शायर नहीं हूँ,

मेरा अलग अंदाज़ है, मेरी अपनी पहचान है,
इसे घमंड मत समझना, ये मेरा स्वाभिमान है,

मैदान-ए-जंग में वीरता के किस्से मशहूर हैं हमारे,
मेरे बाणों की वर्षा से महारथी घायल हुए हैं सारे,

अगर यकीन ना हो तो पूछ लो इस महफिल में,
मेरे दुश्मन भी यही कहेंगें कि मैं कायर नहीं हूँ।

मैं कोई कवि नहीं हूँ, मैं कोई शायर नहीं हूँ ....

~ अम्बुज गर्ग (बिजनौरी)
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3 वर्ष पहले

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