ज़ख्म, दर्द, प्यार, न जाने क्या-क्या है।
ज़िंदगी बेताब हूँ मैं, मुझे बता तेरे फ़साने क्या-क्या हैं।
सोने जाता हूँ तो नींद नहीं आती है,
असाइनमेंट, एग्जाम, खेल, दोस्त,
और क्या-क्या बताऊँ मेरे सिरहाने क्या-क्या है।
ग़म में और खुशी में अब फ़र्क नहीं कर पा रहा हूँ,
ज़िंदगी को मुस्कुराकर बस जिए जा रहा हूँ।
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