राम का दाना राम का पानी
चुंगे फुर्र हो चिड़िया रानी
सुनने बैठोगे तुम सबकी
अपनी अपनी राम कहानी
एक बात तो गाँठ बाँध लो
चले राम की ही मनमानी
राम की मर्जी राम ही जाने
क्या ही अचरज क्या हैरानी
भरा राम ने सोना दिन में
रैन बनाई सूरमा दानी
तौलें सबको बूढ़ी आँखें
नन्हें नयनों में नादानी
ध्यान सभी का रखें राम जी
बिन ब्याही रहती ना कानी
दिन रहते ना सदा एक से
कहें सभी यह दुनियाँ फानी
राम रतन धन पाया जबसे
हुईं मगन हैं मीरा रानी
करें काम सब राम ही पूरन
आलोक की तबियत क्यों अकुलानी
-आलोक
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