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हम बच्चों की हथेली खोल नानी का चूमना

                
                                                         
                            सूरज जल्दी जा रहा है थक हार के
                                                                 
                            
होने लगा है यही महीने में क्वार के

सीखा है सुनो मैंने तो यह एक तरीक़ा
तन्हाइयों में देखता खुद को निहार के

हर बार ही महसूस यह मैंने किया है
वैभव हैं माँ के पाँव में सारे संसार के

पहले ही बनी खर्च की फ़ेहरिस्त देख कर
पस्त होते हौसले अपनी पगार के

नजदीक जाके नदी के सुना जो ध्यान से
नगमें गा रही दुल्हनियां कोई प्यार के

हम बच्चों की हथेली खोल नानी का चूमना
रुपये रख दिये हों मानो कइयों हज़ार के

खाक के जैसी ही यह आलोक को लगी
देख लिया जिंदगी को जब गुजार के
-आलोक
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23 घंटे पहले

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