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                            हिन्दू राष्ट्र, ब्राह्मणवाद, ठाकुरवाद मुर्दाबाद के जो नारे हैं,
                                                                 
                            
पूछ रहा भारत का जन-जन, ये कैसे अब नज़ारे हैं?
बच्चों को आगे करके तुम, कैसी नीति अपनाओगे?
क्या भारत माँ को गाली दे, अधिकार उन्हें दिलवाओगे?

अश्लील तख्तियाँ हाथों में ले, कैसी यह उद्दंडता हैं?
यह अधिकारों की लड़ाई नहीं, संस्कारों की निर्धनता हैं।अगर तुम नारी हो, तो वाणी का भी कुछ सम्मान करो।कैमरों के सम्मुख आकर, अपनी गरिमा का ध्यान करो।

मासूमों की ढाल बनाकर, जो झूठ का जाल बिछाते हैं,
मोदी के विरोध में अंधे होकर, देश में आग लगाते हैं।विदेशी फंड की रोटियों पर, जो भारत तोड़ने निकले हैं,
बच्चों की आड़ में, विष के बीज बोने ही निकले हैं।

शिक्षा यदि मुद्दा हैं तो फिर, चर्चा से क्यों भागते हो?सरकार अगर तैयार खड़ी, फिर नफरत क्यों बाँटते हो?भारत की पावन धरती को, क्या कलुषित कर डालोगे?देश जलाने वालों से मिलकर, कैसा इतिहास बनाओगे?

धारा 370 का , इन बच्चों से क्या नाता हैं?
उमर खालिद की रिहाई का , शिक्षा से क्या नाता हैं ?मासूमों के अधिकारों का , क्यों सौदा करने आते हो ?राष्ट्र-विरोधी नारों में , बच्चों को क्यों फँसाते हो ?

"जय भीम" अगर पावन हैं, तो "जय श्रीराम" से बैर क्यों?
अपने ही इतिहास और संस्कृति से बन बैठे गैर क्यों?जागो भारत के नवनिहालों , अब हर षड्यंत्र पहचानों तुम,
राष्ट्रहित सर्वोपरि रखकर , अपना स्वाभिमान जानो तुम।

-आलोक शर्मा 
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एक घंटा पहले

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