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हेमंत ऋतु...

                
                                                         
                            आई सर्दी, आई सर्दी
                                                                 
                            
नहीं किसी से हमदर्दी
उसके तीखे तेवर से,
घबराते सब नर-नारी।
अग्नि के शरण गये
जटा-जूट धारी।
कोहरा ,पाला उसके मीत,
भानु हुआ उससे भयभीत।
खोई चमक भानु ने अपनी,
घर -घर जलती है अग्नि।
कोहरे के हमले से ,
भानु बहुत घबड़ाया।
किसी कोने में जाकर ,
अपना मुँह छिपाया।
बूढ़ों के हैं हाड़ काँपते,
बच्चे उछलें दे तारी।
सर में दौड़ें हंस , सवन,
बतखें मारी किलकारी।
हीटर ,ब्लोवर मंहगे ,
चाय की मारा मारी।
आई सर्दी ,आई सर्दी ,
नहीं किसी से हमदर्दी

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7 वर्ष पहले

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