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भार्गव राम खण्डकाव्य - 51

                
                                                         
                            किया राम ने धनु संधान,
                                                                 
                            
सीय स्वयंबर मिथिला में।
हर्षित हो गई सिगरी नगरी,
ध्वनि गूंज गई त्रिभुवन में।।

खुल गई थी समाधि जामद्गन्य की,
थे समाधि लगाये गिरि महेंद्र पर।
जमदग्नि राम ने अब ध्यान लगाया,
थी शिव पिनाक भंजन कर्ण कुहर।।

शिव गुरु का अपमान जान,
थे चल पड़े राम परशु लेकर।
पवन मार्ग से तुरत पहुँच गये,
पिनाक भंजन जनक नगर।।

रेणुका नंदन रामहिं देखि,
भयभीत हो गई सिगरी सभा।
राजा जनक अरु ऋषि मुनि,
थे कर जोरि खड़े बीच सभा।।

सभी अभिवादन कर रहे,
'राम राम ' सम्बोधन कर।
भार्गव राम का संकेत पाय,
बैठे राजा ऋषि मुनिवर।।
 
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8 घंटे पहले

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