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अध्यात्म पर दोहे

                
                                                         
                            उड़ जा पंछी उस देश, जहां न राग न द्वेष।
                                                                 
                            
जँह पर कोई नहि भेद,ऐसा है वह देश।।1।।
शीतल मन्द पवन सदा, ताप नहीं उस देश।
बसिये ऐसे देश में, रोग जरा नहि शेष।।2।।

- अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।
 
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4 वर्ष पहले

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