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बेग़ैरत तलाशते

                
                                                         
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कीड़े अंधेरे में रौशनी तलाशते
जैसे भूखे बच्चे रोटी तलाशते
वो मेरे घर अब नहीं आता
मेरी सड़क उसके पांव तलाशते
हमसे ज्यादा हमारी फिक्र कौन करे
वो मां है हमेशा बेटों की राह तलाशते
नज़रे धुंधली होती जा रही है
आँखे अब ऐनक तलाशते
वो मुझमे में मुझसे खो गया
अब हम खुद को तलाशते
क्या सुकूं ख़त्म हो गया यहां
पुरानी तस्वीरों में खुशिया तलाशते
उसके बग़ैर दिल ऐसे तड़पता
तेज धूप के बाद जैसे लोग शाम तलाशते
वो जा चुका है भुला चुका है
हम उसे यूं ही बेग़ैरत तलाशते
-ऐ के गौतम
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3 hours ago

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