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मेरी भावना को लफ्ज़ समझते हैं

                
                                                         
                            मैं लिखता हूं अपनी भावनाओं को
                                                                 
                            
वो इसे सिर्फ लफ्ज समझते हैं
बनते हैं बहुत नादान
मेरी भावनाओं को खूब कुरेदते हैं 
निगाहों से बात, जुबां ख़ामोश है
मेरे वो इशारे को खूब समझते हैं !
मेरी भावना की कद्र ही नहीं उनको
कहाँ फायदा है ये खूब समझते हैं!
अक्सर ख़ामोश रहना मेरी आदत है,
दिलों की गुफ़्तगू कुछ लोग समझते है!

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6 वर्ष पहले

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