मिज़ाज-ए-शायरी सी है वो
इक अजनबी सी है वो
जो ज़ुबां पर आकर रूक जाती है
कुछ ऐसी अनकही सी है वो
उसके आगाज़ से काफ़ूर हो अँधेरा
बाख़ुदा रोशनी सी है वो
देखकर अाती है चेहरे पर जो रौनक़
किसी बच्चे की हँसी सी है वो
ज़िदा रहने का मतलब तो है अजीत
वो मिले, ज़िदगी सी है वो
अजीत यादव
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