हद की हद पार करके, चाहने लगा हूं।
तस्वीर तेरी पानी में, उतारने लगा हूं।।
तू हो ना जाए ओझल, आंखो से जानेजां ।
इस लिए अब नींद भी त्यागने लगा हूं।।
अब रहा ना होश,मुझे खुद को संभालने का।
रात~दिन तुझे इस कदर संभालने लगा हूं।।
जमाना कर भी दे रुसवा मुझे दुनिया से "बेखबर"।
अब मैं तुझे ही अपनी "दुनिया मानने लगा" हूं।।
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