तू मेरी चाहत
तू मेरी चाहत,
तू मेरी आदत,
तू ही मेरे दिल की राहत,
तू ही मेरी आरज़ू।
तू ही मेरी पहली और आख़िरी अमानत,
तू मेरी इनायत,
तू मेरी इबादत,
तू ही मेरी बंदगी।
तू ही मेरा आसमान,
तू ही मेरी ज़मीन,
तुझसे ही मेरी ज़िंदगी रंगीन।
तू है तो सब कुछ लगता है हसीन,
तू ही मेरे जीने की उम्मीद।
तू नहीं तो ज़िंदगी लगे
वीरान और रंगहीन।
तू ही मेरा ख़्वाब,
तू ही मेरा ख़ुमार,
तू है तो ज़िंदगी है ख़ुशहाल।
तू हँसे तो ज़िंदगी लगे बेमिसाल।
— अजयकुमार
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X